लो याद आगई वो पहली कविता जो हमने बचपन मे पढी थी, याद आई आप को ……………….
“उठो लाल अब आंखें खोलो
पानी लायी मुह धो लो
बीती रात कमल दल फुले
जिनके ऊपर भावारे झूले
चिङिया चहक उठी पेडो पर
बहने लगी हवा सुंदर
नभ में न्यारी लाली छाई
धरती ने प्यारी छवि पायी
ऐसा सुन्दर समय न खो
मेरे प्यारे अब मत सो “
अरे अब तो जागो……………….
Posted by kuldeepsingh