इंतजार जैसे उसका इमान हो
कुछ एसे ही वो इंतजार करता रहा
उस लहर का, जो छोड़ गयी थी
कल रात कुछ सीपिया तो कुछ मोती जैसे कदमो के निशां
लहरों का क्या है ,
आती है … चली जाती है
पर उस किनारे का क्या
जो देता है उतना ही प्यार उतना ही दुलार
हर आने वाली उस लहर को
जिसे आख़िर मे चले जाना है
पल भर का साथ था,
फिर मिलन इंतजार
हर लौटती उस लहर को,
जो छोड़ आई थी अपने कदम-ए-निशां
उस किनारे पर, पिछली रात को ….
KS
Posted by kuldeepsingh